# फ़ारसी ज़बान के संरक्षण और हकीम अबुल क़ासिम फ़िरदोसी को श्रद्धांजलि दिवस पर, इस्लामी इंक़ेलाब के सर्वोच्च नेता का पैग़ाम

- सैयद मोजतबा हुसैनी ख़ामेनेई
- प्रकाशित: 15 मई 2026 (2026-05-15)
- URL: https://mojtabakhamenei.world/hi/messages/message-persian-language-day-commemoration-ferdowsi/
- Persian original: https://mojtabakhamenei.world/fa/messages/message-persian-language-day-commemoration-ferdowsi/

फ़ारसी ज़बान के संरक्षण और हकीम अबुल क़ासिम फ़िरदोसी को श्रद्धांजलि दिवस पर , इस्लामी इंक़ेलाब के सर्वोच्च नेता का पैग़ाम इस तरह हैः

बिस्मिल्लाह अर्रहमान अर्रहीम

फ़ारसी ज़बान बोलने और लिखने का साधन होने के साथ ही ईरानियों की पहचान , सोच से जुड़ने की कड़ी और उन की पहचान की सरहदों को बनाती है। फ़ारसी ज़बान और साहित्य , विश्व स्तर पर इस्लामी गणराज्य ईरान की संस्कृति और सभ्यता को बढ़ावा देने की सब से ज़्यादा गुंजाइशों और सलाहियतों में से एक है और फ़ारसी ज़बान को मज़बूत बनाने के सिलसिले में हमारे बुद्धिमान शहीद रहबर (अल्लाह उन के दर्जे बुलंद करे) की सफ़ारिश , " ईरानी-इस्लामी सभ्यता" के प्रभुत्व की राह का चेराग़ है।

ईरान की अज़ीज़ क़ौम ने तीसरे पाकीज़ा डिफ़ेंस में भी , पिछली 2 थोपी गयी जंगों की तरह यह साबित कर दिया कि फ़िरदोसी की पौराणिक कथाएं , उन की ज़िंदगी की हक़ीक़त और उन की बहादुर शख़्सियत की वास्तविक तस्वीरें हैं और शाहनामे की मानव निर्माण , बहादुरी और क़ुरआनी अर्थ , ईरान की तमाम क़ौमों और तबक़ों को अपनी पहचान , मौलिकता और स्वाधीनता की रक्षा और इसी तरह "ज़हाक रूपी" हमलावर दुश्मनों के ख़िलाफ़ जिद्दो जेहद में एकजुट और समन्वित बनाते हैं।

मौजूदगी , रक्षा और फ़त्ह की यह बेमिसाल शौर्यगाथा , संस्कृति , साहित्य और कला क्षेत्र से संबंध रखने वालों के कंधों पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी डालती है ताकि वो भी फ़िरदोसी की तरह उठ खड़े हों और अवाम के आंदोलन के क्रम में कलाकारों के आंदोलन को शामिल करें। सोच और ज़बान को कला और हुनर से जोड़ दें और क़ौम की महाजागरुकता की दास्तान को इतिहास में हमेशा के लिए अमर बना दें।

दूसरी ओर राक्षस रूपी और दुनिया के शैतानों के हमले के मुक़ाबले में ग़ैरतमंद रेज़िस्टेंस और गौरवशाली फ़तह ने क़ौम को सभ्यतात्मक स्वाधीनता की रक्षा और अमरीका की सांस्कृतिक यल्ग़ार और जीवन शैली से जुड़े हमलों के मुक़ाबले के लिए और ज़्यादा तैयार कर दिया है ताकि सांस्कृतिक मैदान में सक्रिय लोगों की पहल और इनोवेशन के ज़रिए भाषाई और वैचारिक रक्षा और बच्चों , नौजवानों और जवान नस्ल के विकास की दिशा में निश्चित कामयाबी तक बचे हुए चरणों को ज़्यादा दृढ़ता के साथ तय किया जा सके , अल्लाह की मदद से।

सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई

15 मई 2026
