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  3. 31 अक्तूबर 2026

सशस्त्र बलों के वरिष्ठ कमांडरों की सर्वोच्च कमांडर से मुलाक़ात

यह मूल फ़ारसी पाठ का अनुवाद है। मूल फ़ारसी पाठ

सशस्त्र बलों के वरिष्ठ कमांडरों ने सशस्त्र बलों के माननीय सर्वोच्च कमांडर हज़रत आयतुल्लाह सैयद मोजतबा ख़ामेनेई से मुलाक़ात की।

इस मुलाक़ात में क्रांति के नेता ने «शत्रुओं का शक्तिशाली ढंग से मुक़ाबला करने के लिए सूझबूझ भरी युद्धक तत्परता» को «अधिकतम प्रतिरोधक क्षमता» की अनिवार्यताओं में से बताया और निर्देश दिया कि हर स्तर और हर प्रकार के ख़तरे का सामना तत्काल, प्रभावी और बिना किसी भौगोलिक सीमा के जवाब से किया जाना चाहिए।

हज़रत आयतुल्लाह सैयद मोजतबा ख़ामेनेई ने स्पष्ट रूप से कहा: यदि शत्रु फिर से सैन्य या आतंकवादी हमले शुरू करते हैं, तो इस्लामी गणतंत्र के सशस्त्र बल और ईरानी राष्ट्र ही हैं जो उनके अंत का समय और शर्तें तय करते हैं।

सर्वोच्च कमांडर ने इसके अलावा सैन्य ख़ुफ़िया की संरचना को सुदृढ़ करने, «डॉक्ट्रिन» और «टैक्टिक» दोनों क्षेत्रों में स्वदेशी रक्षा को गहरा करने, आधुनिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए अद्यतन रक्षा और सुरक्षा क्षमताओं के विकास, तथा आध्यात्मिक शक्ति और जिहादी भावना को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया, और साथ ही सशस्त्र बलों की आजीविका संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति तथा उनके समर्थन के लिए अनवरत प्रयास पर भी बल दिया।

सर्वोच्च कमांडर के निर्देशों के एक अन्य भाग में यह तय किया गया कि लक्ष्य-सूची (टार्गेट बैंक) को इस प्रकार अद्यतन किया जाए कि अमेरिकी-ज़ायोनी शत्रु की विभिन्न प्रकार की भौतिक और अभौतिक संपत्तियाँ सशस्त्र बलों की मारक सीमा में आ जाएँ।

उन्होंने सशस्त्र बलों के प्रति राष्ट्रीय समर्थन को ईरान-विरोधी विदेशियों और देश के भीतर उनके भाड़े के एजेंटों के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता के स्तंभों में से एक बताया और आगे कहा: मैदानों में जागृत राष्ट्र की आठ महीने की उपस्थिति आठ वर्षीय पवित्र प्रतिरक्षा का ही विस्तार है, जिसने सैन्य, पुलिस और बसीजी बलों की दृढ़ता के साथ-साथ ईरान की प्रादेशिक अखंडता और इस्लामी व्यवस्था की रक्षा की है और आगे भी करेगी।

इस्लामी क्रांति के माननीय नेता ने विभिन्न देशों में प्रतिरोध मोर्चे की सूझबूझ भरी दृढ़ता की सराहना करते हुए मोर्चों की एकता को पश्चिम एशिया में नई राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था को आकार देने में रणनीतिक प्रभाव वाला एक निर्णायक कारक बताया और आशा व्यक्त की कि यह नई व्यवस्था नई इस्लामी सभ्यता के निर्माण के लिए इस्लामी राष्ट्रों और सरकारों की एकता का मार्ग दिन-प्रतिदिन अधिक प्रशस्त करेगी।

सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ़ के प्रमुख मेजर जनरल अब्दुल्लाही, सेना (आर्तेश) के मुख्य कमांडर मेजर जनरल हातमी, और इस्लामी क्रांति संरक्षक बल (सिपाह-ए-पासदारान) के मुख्य कमांडर मेजर जनरल वहीदी ने सर्वोच्च कमांडर से मुलाक़ात में फ़ारस की खाड़ी के तटों, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के अभियान क्षेत्रों, ओमान सागर और देश की उत्तर-पश्चिमी तथा दक्षिण-पूर्वी सीमाओं पर देश के रक्षकों की तत्परता की स्थिति पर रिपोर्टें प्रस्तुत करने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद तथा टोही, सहायक और युद्धक हथियारों के उत्पादन में कई गुना वृद्धि की रिपोर्ट भी उनके समक्ष रखी।

सर्वोच्च कमांडर ने किए गए कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ सैन्य कमांडरों से कहा कि वे उनका आभार और संतोष सभी सैन्य, पुलिस और बसीजी बलों, इन संगठनों और रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों तथा उनके सम्मानित परिवारों तक पहुँचाएँ।