विश्व साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष के राष्ट्रीय दिवस पर संदेश
यह मूल फ़ारसी पाठ का अनुवाद है। मूल फ़ारसी पाठ
بسم الله الرحمن الرحیم
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत कृपाशील, अत्यंत दयावान है
आज विश्व साम्राज्यवाद (इस्तिकबार) के विरुद्ध संघर्ष का राष्ट्रीय दिवस है, और यह वह दिन है जिसमें असत्य के मोर्चे के सामने सत्य के मोर्चे और ज़ालिम के मोर्चे के सामने मज़लूम के मोर्चे की मोर्चाबंदी के अनेक निर्णायक मोड़ एकत्र हैं। शायद यह कहा जा सकता है कि इस वर्ष 13 आबान को ईरानी क़ौम अपराधी अमेरिका के साथ अपना रुख़ किसी भी अन्य वर्ष से अधिक स्पष्ट और पारदर्शी रूप में जानती है; किंतु अमेरिका की दिन-प्रतिदिन बढ़ती शत्रुता और उसके सामने ईरानी क़ौम की सुदृढ़ मोर्चाबंदी की जड़ों, कारणों और निर्णायक मोड़ों पर दृष्टि डालना इस मार्ग के भविष्य के लिए पथ-प्रदर्शक दीपक है।
ईरानी क़ौम के विरुद्ध अमेरिका के अत्याचार का आरंभ सात दशकों से भी अधिक पहले हुआ, जब उसने राष्ट्रीय संसाधनों और संपदा, विशेषकर तेल, की लूट जारी रखने के लिए 28 मुर्दाद (19 अगस्त 1953) का तख़्तापलट कराया। इसके बाद के दशक भी, इस्लामी क्रांति की विजय तक, ऐसा दौर रहे जिसमें अमेरिका के शासकों ने ईरानी क़ौम की संपत्तियों को लूटने के लिए भरपूर प्रयास किए। इस राह में उन्होंने सावाक की स्थापना करके और समाज पर सुरक्षा का भारी माहौल थोपकर उस समय की अत्याचारी सत्ता के हाथ हर विरोध-आंदोलन को कुचलने के लिए और अधिक खोल दिए। इस्लामी क्रांति की शानदार विजय की दहलीज़ पर भी उन्होंने अपनी कठपुतली सत्ता को बचाए रखने के लिए तरह-तरह की चालें चलीं। ईरानी क़ौम की महान क्रांति की विजय के बाद के दौर में उनके शत्रुतापूर्ण व्यवहार से भी उनकी जन-विरोधी कार्रवाइयों की एक लंबी सूची प्रस्तुत की जा सकती है, जिसमें शामिल हैं: अलगाववादी गुटों, तख़्तापलट करने वालों और उन अंधे दिल वाले मुनाफ़िक़ों का समर्थन, जिन्होंने वैज्ञानिक, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में आम लोगों को निर्ममता से शहीद किया; पहले थोपे गए युद्ध में बाथ पार्टी का प्रत्यक्ष और सर्वांगीण समर्थन; यात्री विमान के नागरिकों का क़त्ल-ए-आम; व्यापक, दीर्घकालिक और कठोर आर्थिक प्रतिबंध; अनेक उपद्रवों और फ़ित्नों की योजना बनाना, उनका समर्थन करना और यहाँ तक कि उन्हें हथियार उपलब्ध कराना; ईरान और इस्लामी उम्मत के राष्ट्रीय नायक सरदार सुलेमानी की हत्या; विभिन्न देशों में ईरानी क़ौम की संपत्तियों और परिसंपत्तियों की चोरी; और अंततः दूसरे और तीसरे थोपे गए युद्धों में प्रत्यक्ष सैन्य आक्रमण, तथा बड़ी संख्या में हस्तियों, वैज्ञानिकों और कमांडरों को और ईरान की मज़लूम जनता के एक विशाल समूह को, नवजात शिशुओं और नन्हे बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, शहीद करना, और इन सबमें सबसे ऊपर इस्लामी क्रांति के महान नेता (अल्लाह उनकी पाक आत्मा को पवित्र करे) को।
इन सभी चरणों में अमेरिका के अहंकारी सरगना और उसके पिछलग्गू सदा अपना वर्चस्व थोपने और ईरान को झुकाने के प्रयास में रहे हैं, और इस ज़ोर-ज़बरदस्ती के नवीनतम रूपों में तो उन्होंने सारे झूठे और छलपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शिष्टाचार और दिखावे भी त्याग दिए हैं और बेशर्मी से देश के विभाजन, क़ौम को घुटनों पर लाने, व्यवस्था के पतन और ईरान की मौलिक और प्राचीन सभ्यता के विनाश के पीछे पड़े हैं। और निस्संदेह हर चरण में वे मैदान की वास्तविकता की मज़बूत दीवार और ग़ैरतमंद ईरानी क़ौम के संकल्प की अटल चट्टानों से टकराए हैं, और अपनी ग़लत गणनाओं और साम्राज्यवादी भ्रमों का परिणाम भारी क़ीमतों की टोकरी में अमेरिकी जनता और अमेरिकी सरकार की कठपुतली सरकारों के कंधों पर डाल दिया है।
अब ईरान की मुसलमान क़ौम के साथ अमेरिका की पुरानी शत्रुता और इस शत्रु के सामने सभी ईरानियों के ग़ैरतमंद प्रतिरोध की कहानी उस बिंदु पर पहुँच गई है कि केवल 13 आबान ही नहीं, बल्कि सभी दिन और सभी घड़ियाँ बड़े शैतान के विरुद्ध डटे रहने और संघर्ष के दिन बन गए हैं। अब फ़ारस की खाड़ी, विशेषकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य का दृश्य, जिस प्रकार उसने अमेरिका के अजेय होने की कहानी को झूठा सिद्ध कर दिया है, उसी प्रकार उन सरकारों की कमज़ोरी और दयनीयता को भी दिखाता है जो अपनी क़ौम के अतिरिक्त किसी और शक्ति पर भरोसा करती हैं, और अपनी कठपुतली सरकारों की रक्षा करने में बड़ी शक्तियों की बेवफ़ाई और असमर्थता को भी। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का प्रबंधन लागू करना और क्षेत्र के देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डों को नष्ट करना, यद्यपि तीसरे थोपे गए युद्ध में अमेरिका के आक्रमण और अपराध की प्रतिक्रिया था, फिर भी साथ ही यह क्षेत्रीय स्तर पर साम्राज्यवाद के विरुद्ध एक आरंभिक जिहाद भी माना जाता है, जो अतिक्रमणों के दोहराए जाने की स्थिति में कहीं अधिक व्यापक आयाम ग्रहण कर लेगा। शक्ति का यह चिह्न, सत्य के मोर्चे के रणक्षेत्रों की एकता और फ़िलिस्तीन व लेबनान से लेकर इराक़ और यमन तक प्रतिरोध मोर्चे के सूझबूझ भरे और सशक्त वीरतापूर्ण कारनामों के साथ, सत्य के मोर्चे के ध्वज के ऊँचा होने और नई विश्व व्यवस्था की भूमिका तैयार होने की एक उज्ज्वल और आशाजनक भोर है; क्योंकि जब भी सत्य के मोर्चे में अल्लाह पर भरोसा, दृढ़ता और त्याग हो, असत्य का मोर्चा, चाहे उसकी शक्ति और सामर्थ्य कितनी भी हो और वह कोई भी हो, उसके सामने टिक नहीं पाएगा, और पीछे हटना और पराजय ही उसका निश्चित अंजाम है, क्योंकि «اِنَّ الباطلَ کانَ زَهوقا» (निश्चय ही असत्य मिटने ही वाला है — क़ुरआन, सूरह इसरा 17:81)।
अल्लाह का शुक्र है कि ईरानी क़ौम ने शुद्ध मोहम्मदी इस्लाम (उन पर और उनके परिवार पर अल्लाह का दुरूद व सलाम हो) की शिक्षाओं, इस्लामी क्रांति के ज्ञान और अपने तत्वदर्शी नेताओं, महान ख़ुमैनी और शहीद ख़ामेनेई (अल्लाह उन दोनों के पवित्र दर्जे बुलंद करे), के मत से बड़े सबक़ भली-भाँति सीख लिए हैं, और ईश्वरीय वादों के पूरा होने के साथ दिन-प्रतिदिन इस मार्ग के सत्य होने पर उसका ईमान और गहरा होता गया है। आज साम्राज्यवादियों की स्वयं रची गई रुसवाई के परिणामस्वरूप अमेरिका की पतनशील शक्ति और वर्चस्व, सैन्य कठोर शक्ति और अंतरराष्ट्रीय सॉफ़्ट पावर, दोनों आयामों में, एक अपरिवर्तनीय पतन का शिकार हो गया है और उसके ढहने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है।
यदि अब भी कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें वर्चस्ववादी व्यवस्था में व्यवहार के बदलने या दलीय और गुटीय फेरबदल से थोड़ी-सी भी आशा है, या जो यह समझते हैं कि अमेरिका को रियायतें देकर वे उसे ईरानी क़ौम से शत्रुता छोड़ने पर राज़ी कर सकते हैं, तो वे गंभीर भूल में हैं। यह असत्य धारणा उन महान विजयों के प्रति कृतघ्नता है जो ईरान की मुसलमान क़ौम ने अल्लाह पर भरोसे, दृढ़ता और जिहाद के साये में प्राप्त की हैं। बड़े शैतान की आकांक्षा ईरानी क़ौम का बिना शर्त आत्मसमर्पण है, और वर्चस्ववादी शत्रु के प्रति आत्मसमर्पण की ओर ज़रा-सा झुकाव भी उस महान पूँजी को, जो शहीदों के ख़ून की बरकत से और क़ौम के एक-एक व्यक्ति के त्याग से प्राप्त हुई है, बर्बाद कर देगा, और अहंकारी शत्रु को और अधिक लालच तथा आगामी युद्धों और दुस्साहसों के लिए और अधिक ढीठ बना देगा।
पूर्ण प्रतिरोधक क्षमता के बिंदु तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग सर्वांगीण प्रगति के पथ पर “और अधिक शक्तिशाली ईरान” की रणनीति को जारी रखना है; और एकजुटता, एकता और सामाजिक सामंजस्य इस मार्ग में सफलता का मूल तत्व है, जिसका क़ौम और अधिकारियों की हर व्यक्तिगत और सामाजिक बात और कर्म पर छाया रहना आवश्यक है। इस संबंध में जिस प्रकार अधिकारियों के प्रति क़ौम का समर्थन आवश्यक है, उसी प्रकार दोगुनी और जिहादी सेवा, जनता के साथ आत्मीयता, उसकी आजीविका, सुख-सुविधा और भौतिक व आध्यात्मिक विकास की व्यवस्था तथा उसकी प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता की रक्षा पर अधिकारियों के ध्यान का जारी रहना और बढ़ना भी महत्वपूर्ण है।
प्रिय ईरान का उज्ज्वल और गौरवशाली भविष्य बनाने के लिए अग्रणी वर्ग हमारे युवा, विश्वविद्यालयों के छात्र और स्कूली विद्यार्थी हैं, जिन्हें निरंतर “निराशा, नाउम्मीदी और ‘नहीं हो सकता’” की अँधेरी माँद पर क़ब्ज़ा करके उसे ध्वस्त करने और “उम्मीद और ‘हम कर सकते हैं’” के उजले घर को जीतने के प्रयास में रहना चाहिए। इस मिशन की अनिवार्यता असाधारण दक्षता, ज्ञान और तक़वा, कौशल और नैतिकता, संकल्प और असाधारण परिश्रम के विभिन्न हथियारों से लैस होना, और उच्च लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए “हम-अहदी” है।
आशा है कि ईश्वरीय कृपा से और हमारे सरवर (अल्लाह उनके ज़ुहूर में जल्दी करे) की दुआ से ईरानी क़ौम जल्द से जल्द विजय, सौभाग्य और सर्वांगीण प्रगति का अनुभव करे, और बड़े शैतान के वर्चस्व के और अधिक तथा और तेज़ पतन के साधन जुटें। «اِنّهم یَرونَهُ بعیداً و نَراهُ قریباً» (वे उसे दूर देखते हैं और हम उसे निकट देखते हैं — क़ुरआन, सूरह मआरिज 70:6-7)।
सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई
13 आबान 1405